Samastipur Rain Gauges : समस्तीपुर में पंचायतों में लगे वर्षा मापक यंत्र बिना देखरेख हो गए बर्बाद.

समस्तीपुर जिले के पंचायत स्तर पर लगाए गए स्वचालित वर्षा मापक यंत्रों का रखरखाव न होने के कारण सही आंकड़े एकत्रित नहीं हो पा रहे हैं। इन यंत्रों के चारों ओर जंगल उग आए हैं, जिससे वर्षा के बाद भी पेड़ों के पत्तों से पानी टपक कर यंत्र में चला जाता है और सही आंकड़े नहीं मिल पाते। कई यंत्र तो किसी किसान या किसान सलाहकार के घर पर लगाए गए हैं, जिससे पंचायत के लोग अनजान हैं और कई मुखिया भी इसकी जानकारी से वंचित हैं।

वर्षा मापक यंत्रों का उद्देश्य:

इन स्वचालित वर्षा मापक यंत्रों को पंचायत स्तर पर लगाने का उद्देश्य था कि सुखाड़ की स्थिति में किसानों को मुआवजा देने में कोई समस्या न हो। पहले सिर्फ प्रखंड मुख्यालय में मैन्युअल यंत्र होते थे, जिनकी देखरेख कृषि विभाग करता था। अब पंचायत स्तर पर लगाए गए यंत्रों की जिम्मेदारी एक निजी एजेंसी को सौंपी गई है, जो सही से देखभाल नहीं कर रही है।

स्थानीय जानकारी की कमी:

   

पंचायतों में लगे स्वचालित वर्षा मापक यंत्रों के आंकड़े स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नहीं होते। ये आंकड़े सीधे पटना के सांख्यिकी विभाग के निदेशालय में दर्ज होते हैं। रोसड़ा प्रखंड मुख्यालय और इसके 09 पंचायतों में लगे यंत्रों की देखरेख भगवान भरोसे है। इन यंत्रों की कोई स्थानीय मॉनिटरिंग नहीं होती और इनके कार्यरत रहने का कोई डाटा नहीं मिलता।

रखरखाव की स्थिति:

देखभाल न होने के कारण यंत्रों के परिसर में बड़े-बड़े जंगल-झाड़ उग आए हैं। प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी सत्येन्द्र कुमार ने बताया कि वे केवल बाहरी परिसर की रिपोर्ट विभाग को भेजते हैं। मेंटेनेंस की रिपोर्टिंग उनकी जिम्मेदारी नहीं है।

समस्या की गंभीरता:

इस स्थिति के कारण किसानों को सही वर्षा के आंकड़े नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे मुआवजा देने में समस्या हो सकती है। पंचायतों में स्वचालित वर्षा मापक यंत्रों की सही देखरेख और मॉनिटरिंग की व्यवस्था करना आवश्यक है ताकि किसानों को सही और समय पर जानकारी मिल सके।

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