Samastipur News : समस्तीपुर नगर निगम से शहर के नए वार्डों में स्ट्रीट लाइट नहीं लगने से वार्डों के लोग नाराज हैं। नाराज लोग नई स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए अपने क्षेत्र के वार्ड पार्षद पर लगातार दवाब दे रहे हैं। उनके दवाब पर वार्ड पार्षद नगर निगम प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं। जब भी वार्डों में टैक्स वसूली का मुद्दा उठता है, तो लोग अपनी बुनियादी सुविधाओं की कमी गिनाने लगते हैं।

जानकारी के अनुसार नगर निगम प्रशासन ने शहर के 31 पुराने और 16 नए कुल 47 वाडों में नई स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए कुल चार हजार से अधिक स्थलों का चयन कर रखा है। लेकिन इन स्थलों पर अभी तक नई स्ट्रीट लाइट लगाने में नगर निगम तकनीकी पेच खड़ा कर नगर विकास एवं आवास विभाग से मार्गदर्शन की मांग कर रखी है। जो मार्गदर्शन अभी तक नहीं मिला है।

इस संबंध में नगर आयुक्त केडी प्रोज्जवल का कहना है कि मार्गदर्शन आने के बाद नई स्ट्रीट लाइट लगाने का काम शुरू हो जाएगा। उनका कहना है कि कुछ बिंदुओं पर तकनीकी समस्या को दूर करने को लेकर मार्गदर्शन मांगा गया है। वहीं मेयर अनिता राम ने कहा कि उन्होंने भी नगर विकास मंत्री से मिल कर नई स्ट्रीट लाइट को लेकर एक ज्ञापन दिया था। उनसे मार्गदर्शन अविलंब देने का अनुरोध किया गया है।


बता दें कि समस्तीपुर नगर निगम क्षेत्र में 47 वार्डों में नई स्ट्रीट लाइट लगाने व उनका रखरखाव करने पर पूर्व में लगाई गई रोक हट चुकी है। नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार सरकार ने रोक हटा ली है। सालभर पहले विभाग ने यह रोक लगाई थी। रोक हटाने संबंधी गाइडलाइंस विभाग ने नगर निगम, समस्तीपुर के आयुक्त केडी प्रोज्जवल को भेजी थी, जिसमें नौ बिंदुओं का अनुपालन करते हुए नई स्ट्रीट लाइट लगाने व उनका रखरखाव करने के नर्दिश दिए गए थे।

इस रोक को जनहित में हटाने के लिए समस्तीपुर नगर निगम की मेयर अनिता राम ने पिछले साल विभागीय मंत्री से मिलकर एक ज्ञापन भी दिया था। इस ज्ञापन में बताया गया था कि 16 नए वार्डों के लोगों व वार्ड पार्षदों में नई स्ट्रीट लाइट नहीं लगने से नाराजगी है। इससे पहले नगर निगम के पूर्व नगर आयुक्त विभूति रंजन ने रोक को हटाने को लेकर नगर विकास विभाग से मार्गदर्शन मांगा था।
इस तरह की रोक जिले के सभी नगर परिषद व नगर पंचायत के वार्डों के अलावा राज्य के अन्य सभी नगर निकायों में लगी हुई थी । जब रोक हटा ली गई तब नई स्ट्रीट लाइट लगाने व उनका रखरखाव का काम शुरू होने की बात बताई गई थी। इस दौरान, लाइट लगाने के लिए स्थल चयन का काम पूरा हो जाने के बाद जब स्ट्रीट लाइट लगाने का काम शुरू होने का समय आया तो फिर नया पेच बता कर मार्गदर्शन लेने की बात बता कर आगे का काम रुक गया।
विभागीय गाइडलाइंस में प्रमुख घटकों में शामिल बिंदुओं में जो शर्तें लगाई गई थीं, उनके अनुसार वर्षवार अधष्ठिापित स्ट्रीट लाइट की जांच के लिए नगर निगम (नगर निकाय) स्तर पर जांच समिति गठित कर संबधित लाइट कंपनी के साथ किए गए एकरारनामा के प्रावधानों के अनुसार बिल पर कंपनी के दावों के नष्पादन के बाद ही नई स्ट्रीट लाइट नगर निकाय के द्वारा लगाई जाएंगी।