Patori : वैशाली जिले की बाढ़ से कारण डूबेंगे पटोरी के लोग ?

समस्तीपुर जिले के पटोरी प्रखंड में प्रशासन ने संभावित बाढ़ से निपटने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर तैयारियां की हैं। हालांकि, वास्तविकता यह है कि इतनी बड़ी राशि खर्च करने के बावजूद अगर गंगा में उफान आया तो पटोरी प्रखंड के गंगा तटीय पंचायतों को बचाना मुश्किल होगा। ज्ञात हो कि पटोरी प्रखंड से सटे वैशाली जिले के गंगा तटीय क्षेत्रों में बांध पूरी तरह क्षतिग्रस्त है और कई स्थानों पर 10 से 15 फीट की चौड़ाई में बांध कटा हुआ है।

जहां समस्तीपुर जिले की सीमा समाप्त होती है वहां तक बांध सुरक्षित है, परंतु इसके बाद वैशाली जिले में बांध की स्थिति खराब है। धमौन बॉर्डर पर वैशाली जिले में कई स्थानों पर बांध कटा हुआ है, जहां से ट्रक, ट्रैक्टर और बैलगाड़ी आसानी से आ-जा सकते हैं। वैशाली जिले के अन्य हिस्सों में भी बांध की स्थिति खराब है। जिओ बैग में मिट्टी भरकर बांध को छोड़ दिया गया है, जो अब फट चुके हैं और बांध क्षतिग्रस्त हो चुका है। पिछले पांच वर्षों में बांध की मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

पटोरी प्रखंड के गंगा तटीय पंचायतों में हर बार वैशाली जिले के क्षतिग्रस्त बांध से पानी फैलता है। दोनों जिलों के प्रशासनिक अधिकारी या बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारी इस समस्या को गंभीरता से नहीं लेते। पटोरी में हर साल बाढ़ आती है और तबाही मचाती है, जबकि समस्तीपुर जिले के अधिकारियों ने पहले भी वैशाली जिला प्रशासन को इस समस्या के प्रति सचेत किया था।

धमौन गांव, जो पटोरी प्रखंड का हिस्सा है, वैशाली जिले से सटा हुआ है। समस्तीपुर जिले में अधिकारियों ने गंगा की संभावित बाढ़ से निपटने के लिए बांध को मजबूत कर दिया है और जिओ बैग में मिट्टी भरकर सुरक्षित रख दिया है। दूसरी ओर, वैशाली जिले के बॉर्डर पर बने बांध में कोई नया काम नहीं हुआ है। बांध की ऊंचाई वर्तमान भूतल से मात्र कुछ फीट है और कई स्थानों पर 10 से 15 फीट की चौड़ाई में कटा पड़ा है, जिससे गंगा तटीय लोग खेती-बाड़ी करने गंगा पार जाते हैं। अगर गंगा के जल स्तर में वृद्धि हुई तो वैशाली जिले से होकर पानी पटोरी प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में फैल जाएगा। पूर्व में भी जब गंगा की बाढ़ आई थी, तब इसका मुख्य कारण यही था।

   

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