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Programmes At Central Agricultural University : पूसा कृषि विश्वविद्यालय में छात्रों को मिलेगी ड्रोन पायलट ट्रेनिंग, कुलपति ने कहा देश में पहली पहल.

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By Samastipur Today Desk

 


 

Programmes At Central Agricultural University : पूसा कृषि विश्वविद्यालय में छात्रों को मिलेगी ड्रोन पायलट ट्रेनिंग, कुलपति ने कहा देश में पहली पहल.

 

Programmes At Central Agricultural University : समस्तीपुर। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के कुलपति डॉ. पी. एस. पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालय अपने छात्रों को सेमेस्टर ब्रेक के दौरान ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग देगा। उन्होंने दावा किया कि छात्रों को इस तरह की ट्रेनिंग उपलब्ध कराने वाला यह देश का पहला विश्वविद्यालय होगा।

 

कुलपति ने बताया कि इसके लिए एक अनूठा मॉडल तैयार किया गया है। इसके तहत ड्रोन पायलट ट्रेनिंग की निर्धारित ₹45,000 फीस के स्थान पर छात्रों से केवल कुछ हजार रुपये की न्यूनतम फीस ली जाएगी। सेमेस्टर ब्रेक के दौरान ट्रेनिंग पूरी होने के बाद अगले सेमेस्टर में छात्रों से ड्रोन स्प्रेइंग, लैंड सर्वे सहित ड्रोन से जुड़े कार्य विश्वविद्यालय परिसर में ही करवाए जाएंगे। इसके बदले मिलने वाले मेहनताने से छात्रों की न्यूनतम फीस भी डिग्री मिलने से पहले वापस कर दी जाएगी।

3 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

सोमवार को विश्वविद्यालय में ‘सॉफ्ट एवं इंटरव्यू स्किल के माध्यम से छात्रों के करियर का विकास’ विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। उद्घाटन समारोह में कुलपति ने कहा कि वे चाहते हैं कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ छात्रों में शामिल हों।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में चयन और विदेशों में नौकरी के लिए सॉफ्ट स्किल और इंटरव्यू स्किल बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, जिनके लिए छात्र दिल्ली जैसे शहरों में लाखों रुपये खर्च करते हैं। इसलिए विश्वविद्यालय ने सेमेस्टर ब्रेक के दौरान ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है।

शिक्षकों और वैज्ञानिकों को भी AI ट्रेनिंग की तैयारी

कुलपति ने कहा कि छात्रों, शिक्षकों और वैज्ञानिकों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्रशिक्षण कार्यक्रम भी जल्द शुरू किया जाएगा, ताकि वे अधिक स्मार्ट और प्रभावी ढंग से काम कर सकें। उन्होंने कहा कि संचार कौशल जीवन में अत्यंत आवश्यक है और छात्रों को अपने विषय के साथ-साथ इस क्षेत्र में भी दक्ष होना चाहिए।

स्कूल ऑफ एग्री-बिजनेस एंड रूरल मैनेजमेंट के निदेशक डॉ. रामदत्त ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में विश्वविद्यालय ने तेज प्रगति की है और एक नई कार्यसंस्कृति विकसित हुई है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के छात्र देश-विदेश में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं और भारतीय छात्र वैश्विक स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं।

कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आर. किरण ने किया और मंच संचालन डॉ. कविताम्बिका ने किया। इस अवसर पर सह-प्राध्यापक डॉ. संजीत कुमार समीर, डॉ. रितंभरा सिंह, डॉ. शिवपूजन सिंह, डॉ. कुमार राज्यवर्धन, डॉ. रमनदीप सिंह, डॉ. एम. संतोष, डॉ. श्रावंती, रश्मि सिन्हा सहित कई शिक्षक, वैज्ञानिक एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।