Bihar Monsoon 2024 : बिहार में इस बार मानसून देर से आएगा मानसून.

बिहार में चार वर्षों के बाद इस बार मानसून देरी से आएगा। पिछले चार वर्षों में तीन बार 13 जून और एक बार 12 जून को मानसून बिहार में प्रवेश कर चुका था, लेकिन इस वर्ष अब तक मानसून के आगमन की सटीक तारीख की भविष्यवाणी नहीं की गई है।

ला-नीना के प्रभाव से सामान्य से अधिक बारिश की संभावना

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि भले ही मानसून देरी से आ रहा है, लेकिन ला-नीना के प्रभाव से इस साल बारिश सामान्य से अधिक हो सकती है। बिहार में मानसून के प्रवेश की संभावित तिथि 13 से 15 जून के बीच है। दरअसल, बिहार में आने वाली मानसून की शाखा पश्चिम बंगाल के इस्लामपुर में 31 मई से रुकी हुई है। वहीं, मानसून का पश्चिमी हिस्सा तेजी से आगे बढ़ते हुए महाराष्ट्र, ओडिशा, छत्तीसगढ़ के बाद गुजरात में भी प्रवेश कर चुका है।

बंगाल की खाड़ी में करंट कम होने से देरी

   

दक्षिण-पश्चिम मानसून ने अपने निर्धारित समय से एक दिन पहले ही 29 मई को अंडमान-निकोबार में प्रवेश किया था। इसके बाद, यह 30 मई को केरल में निर्धारित समय से दो दिन पहले ही पहुंच गया। अरब सागर में मानसून का करंट मजबूत होने के कारण इसका एक हिस्सा तेजी से आगे बढ़ते हुए 8 जून को छत्तीसगढ़ और ओडिशा में प्रवेश कर गया और अब गुजरात में भी पहुंच गया है। जबकि, पूर्वी भारत की ओर का दूसरा हिस्सा बंगाल की खाड़ी में करंट कमजोर होने के कारण 31 मई से ही एक स्थान पर रुका हुआ है।

ला-नीना और अल-नीनो का असर

पेसिफिक ओसियन के तापमान को तीन भागों में बांटा गया है। जब समुद्र का तापमान सामान्य से 0.5 से -0.5 के बीच होता है, इसे नेचुरल फेज कहा जाता है। यदि तापमान 0.5 से अधिक गर्म हो जाता है, तो अल-नीनो की स्थिति बनती है, जिससे मानसून की बारिश दक्षिण अमेरिका की ओर शिफ्ट हो जाती है और भारत में कम बारिश होती है।

वहीं, जब तापमान 0.5 से अधिक ठंडा होता है, तो ला-नीना की स्थिति बनती है। इस स्थिति में बारिश की ट्रैड विंड मजबूत होती हैं, जिससे भारत में अच्छी बारिश होती है। जब भी ला-नीना की स्थिति बनी है, भारत में मानसून की अच्छी बारिश हुई है।

इस बार भी, ला-नीना के प्रभाव से बिहार में अच्छी बारिश की उम्मीद है, भले ही मानसून की देरी हो रही हो।

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