समस्तीपुर में इंजीनियर ने लॉकडाउन में लगाए पपीते के पैधे, हुआ ढ़ाई लाख का मुनाफा. Engineer Planted Papaya in Samastipur

Engineer Planted Papaya in Samastipur: समस्तीपुर जिले के सरायरंजन प्रखंड के खालिसपुर गांव निवासी आआईिटयन व रामकुमार सिंह के पुत्र श्रेयांशु कुमार ने आपदा में अवसर की तलाश कर अपने परिवार के आय में वृद्धि करने में सफलता हासिल की। कोरोना काल में लॉकडाउन अवधि में 15 कठ्ठे खेत में लगाये गये पपीता के पौधों से वे अब प्रतिमाह 30 से 35 हजार रुपये की कमाई कर रहे हैं। उन्होंने 15 कठ्ठे में करीब चार हजार से अधिक पपीता का पौधा लगा रखा है। श्रेयांशु ने बताया कि वे पूना में आईआईटी की पढ़ाई कर रहे थे। जब वे सेमेस्टर आठ में थे तभी मार्च 20 में कोरोना के कारण लॉकडाउन लगने पर घर आ गये। घर पर पढ़ाई के बाद उनका समय बच जाता था।

जिसका सदुपयोग करने के लिए उन्होंने कुछ नया करने का विचार किया। इसी में उन्हें पपीते की खेती करने का आइडिया आया। तब पपीते की खेती करने वाले कुछ किसानों से जानकारी जुटाने के साथ ही ऑनलाइन भी खेती करने के तरीको को खंगाला। उसके बाद अपने 15 कठ्ठे खेत में पपीते के पौधे लगाये। उन्होंने बताया कि खेत में पहले ऑर्गेनिक खाद का उपयोग किया। बाद में बरसात में पौधों में फंगस आने पर रासायनिक कीटनाशक का छिडकाव किया। अक्टूबर 21 में पौधों में पपीता फलना शुरू हुआ। श्रेयांशु ने बताया कि सातवें सेमेस्टर की पढ़ाई के दौरान ही उनका मुंबई की एक कंपनी में कैम्पस सेलेक्शन हो चुका था। आठवें सेमेस्टर की पढ़ाई पूरी होने के बाद अगस्त 20 में उन्होंने कंपनी में योगदान दिया। लेकिन लॉकडाउन के कारण मुंबई के बजाय वर्क फ्राम होम में घर से ही काम करना पड़ा। इसका भी पपीते की खेती को संवारने में लाभ मिला। प्रतिदिन सुबह में दो घंटे वे नियमित रूप से खेत में समय देते हैं। इसके अलावा शनिवार व रविवार की छुट्टी के दिन पूरा समय देते हैं। अब जून में वे मुंबई जाएंगे। उन्होंने बताया कि अब उनके पिता ही पौधों की देखभाल कर पाएंगे।

दो किस्म के पौधे लगा रखें हैं पपीते के : श्रेयांशु ने बताया कि वे अपने खेत में रेड लेडी और एलसी बेरी नाम के दो किस्म के पपीते लगा रखे हैं। एक दिन बीच कर के एक क्विंटल पपीते तोड़ते हैं। उनका 90 प्रतिशत पपीता खेत में ही बिक जाता है। शेष दस प्रतिशत पपीता वे बाजार में जाकर खपाते हैं। उन्होंने बताया कि खेत में 30 रुपये किलो पपीता बेचते हैं जबकि बाजार में ले जाने पर 25 रुपये किलो बेचना पड़ता है। साल भर में करीब चार लाख का पपीता वे बेचते हैं। इसमें से डेढ़ लाख खेती के काम में खर्च होता हे। यानि ढाई लाख का मुनाफा होता है।

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