Rail News : जल्द शुरू होगी हसनपुर – सकरी रेललाइन, मिथिलांचल के ड्रीम प्रोजेक्ट का 50 साल से लोग कर रहे इंतजार.

       

Rail News : करीब पांच दशक से लंबित पड़े मिथिलांचल की ड्रीम प्रोजेक्ट हसनपुर – सकरी रेल परियोजना (Hasanpur-Sakri railline) के चालू होने का रास्ता अब साफ हो गया है। रेल प्रशासन के अनुसार हसनपुर से बिथान तक रेल ट्रैक बिछाने का कार्य पूरा कर लिया गया है। बता दें कि हसनपुर – सकरी रेल परियोजना कुशेश्वरस्थान पक्षी विहार के कारण करीब डेढ़ दशक से बंद पड़ा था।

मार्च के दूसरे सप्ताह में सीआरएस कर सकते हैं निरीक्षण :

समस्तीपुर रेल मंडल (Samastipur Railway Division) के डीआरएम आलोक अग्रवाल ने बताया कि अभी हसनपुर से बिथान तक 11 किलोमीटर रेल सेवा शुरू करने को लेकर युद्ध स्तर पर कार्य चल रहा है। सब ठीक-ठाक रहा तो मार्च के दूसरे सप्ताह से सीआरएस इस रेलखंड का निरीक्षण कर सकते हैं। जिसके बाद अनुमति मिलने पर इस खंड पर ट्रेन सेवा शुरू कर दी जाएगी। इसके साथ ही बिथान से आगे कोराही तक रेल लाइन बिछाने का कार्य शुरू किया जाएगा। बता दें कि कोसी और मिथिलांचल के विकास के लिए यह परियोजना काफी महत्वपूर्ण है। इस योजना के पूरा होने से दरभंगा, खगड़िया, सहरसा की दूरी जहां कम हो जाएगी, वही कोसी व मिथिलांचल की दूरी घट जाएगी। रेलवे लाइन से समस्तीपुर के अलावा खगड़िया व दरभंगा के लोगों को लाभ मिलेगा।

डीआरएम ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में इस प्रोजेक्ट के लिए 75 करोड़ का फंड मिलने के बाद इस योजना पर युद्ध स्तर पर कार्य शुरू करने को लेकर मंडल स्तर पर प्लानिंग पूरी कर ली गयी है। वहीं पक्षी विहार के कारण हरनगर से कुशेश्वरस्थान के बीच कार्य शुरू करने को लेकर रेलवे अधिकारी और वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों के बीच हाई लेवल बैठक होने वाली है। माना जा रहा है कि इस बैठक में रेल लाइन बिछाने के कार्य को अनुमति मिल जाएगी।


50 साल से लोग कर रहे हैं इंतजार :

विदित हो कि इस रेल परियोजना का शिलान्यास भारत के पूर्व रेल मंत्री और मिथिलांचल के दिग्गज राजनेता स्वर्गीय ललित नारायण मिश्रा ने 1974 में किया था। लेकिन उनके मृत्यु के बाद इस इस रेल परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। फिर 1996 में स्वर्गीय रामविलास पासवान के रेल मंत्री बनने पर शुरू हुआ था। उन्होंने 1996 से 1997 के रेल बजट में सकरी से हसनपुर रोड वाया कुशेश्वरस्थान रेलमार्ग पर छोटी लाइन के बदले बड़ी रेल लाइन परियोजना की स्वीकृति दी थी। उस समय 100 करोड़ की अनुमानित खर्च वाली इस परियोजना के लिए बजट में 3 करोड़ का प्रावधान भी किया गया। जिसके बाद भू अर्जन का कार्य शुरू हुआ। भू अर्जन और डिमार्केशन में ही 5 वर्ष बीत गए। फिर वर्ष 2009 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने सकरी से बिरौल तक रेल सेवा का उद्घाटन किया। उसके 10 साल बाद 2018 में यह रेल लाइन 8 किलोमीटर और आगे हरनगर तक पहुंची। जिसका उद्घाटन तत्कालीन रेल मंत्री पीयूष गोयल और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा रिमोट से किया गया था, लेकिन उसके बाद यह रेल लाइन का कार्य आगे नहीं बढ़ सका था।

कोसी और मिथिलांचल के लिए महत्वपूर्ण है यह परियोजना :

कोसी और मिथिलांचल के विकास के लिए यह परियोजना काफी महत्वपूर्ण है। इस रेल परियोजना के पूरा होने से दरभंगा, खगड़िया, सहरसा की दूरी जहां कम हो जाएगी। वहीं समस्तीपुर, खगड़िया रेलखंड का भी महत्व बढ़ जाएगा। हसनपुर से सकरी रेल परियोजना में कुल 10 स्टेशन हैं जिनमे हसनपुर, बिथान, कौराही, हरनगर, बिरौल, नेउरी, बेनीपुर, जगदीशपुर, कुशेश्वरस्थान और सकरी शामिल है। इसमें हसनपुर , बिथान और कौराही से हरनगर तक कार्य होना बाकी है। जबकि दरभंगा की तरफ से सकरी से हरनगर तक रेल लाइन पूरी हो चुकी है। समस्तीपुर रेल मंडल के मंडल रेल प्रबंधक आलोक अग्रवाल का बताना है कि सकरी से हसनपुर रेलखंड की परियोजना में हसनपुर बिथान के बीच इस वित्तीय वर्ष में काम को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित रखा गया है। कुशेश्वर स्थान के बीच वन विभाग की आपत्ति के कारण काम बाधित है। एनओसी मिलते ही आगे का काम भी पूरा कर लिया जाएगा।

15 वर्षों से ठप है रेलवे लाइन बिछाने का काम :

बता दें कि कुशेश्वरस्थान पक्षी विहार के पास योजना पर13 सालों से कार्य ठप है। दरभंगा के तत्कालीन डीएफओ दिगंबर ठाकुर द्वारा दिसंबर 2008 में इस पर आपत्ति किया था। जिसके बाद कुशेश्वर स्थान पक्ष विहार के पास रेलवे लाइन के निर्माण पर रोक लगा दी गई थी। तब से कुशेश्वर स्थान के पास रेलवे लाइन बिछाने का कार्य बंद था। जिस पर करीब दो वर्ष पूर्व पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने सशर्त योजना पर कार्य शुरू करने की अनुमति दी थी।

 

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