समस्तीपुर में डॉ वर्गीज कुरियन के जन्म शताब्दी समारोह का हुआ आयोजन. | Sudha Samastipur

समस्तीपुर, 25 नवंबर,2021 | झुन्नू बाबा

 

समस्तीपुर में गुरुवार को डॉ वर्गीज कुरियन के जन्म शताब्दी समारोह का आयोजन किया गया। श्वेत क्रांति के जनक दुग्ध सहकारिता के प्रेरणा एवं भारत के एक प्रसिद्ध सामाजिक उद्यमी डॉ वर्गीज कुरियन को उनके जन्म शताब्दी समारोह के अवसर पर शत-शत नमन करते हुए अपने आपको गौरवान्वित महसूस करते हैं कि सहकारिता डेरी जगत में डॉ वर्गीज कुरियन के उत्कृष्ट योगदान अतिस्मरणीय रहेगा।

 

जो बिलियन लिटर आईडिया जैसा विश्व का सबसे बड़ा कृषि विकास कार्यक्रम के लिए मशहूर है। इस ऑपरेशन फलाड ने भारत को विकसित देशों से भी ज्यादा तरक्की दी और सन 1990 में ही इस दुग्ध अपूर्ण देश भारत को विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बना दिया। भारत में उनके जन्मदिन को नेशनल मिल्क डे के रूप में मनाया जाता है और इसकी शुरुआत साल 2014 में की गई थी. उन्हें भारत के ‘ऑपरेशन फ्लड’ (श्वेत क्रांति) का जनक कहा जाता है. उनका 9 सितंबर 2012 को निधन हो गया. कुरियन की अगुवाई में चले ‘ऑपरेशन फ्लड’ के बलबूते ही भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना. बता दें कि भारत का ऑपरेशन फ्लड दुनिया का सबसे बड़ा डेयरी डवलमेंट प्रोग्राम था, जिसे भारत में दूध उत्पादन को बढ़ावा मिला.

 

अगर जमीनी स्तर पर देखें तो कुरियन की ये उपलब्धि दूध का उत्पादन बढ़ाने से कहीं ज्यादा है. कुरियन ने चेन्नई के लोयला कॉलेज से 1940 में विज्ञान में स्नातक किया और चेन्नई के ही जीसी इंजीनियरिंग कॉलेज से इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की. डॉक्टर कुरियन के नेतृत्व में अमूल की सफलता को देखते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने 1965 में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड की स्थापना की एवं डॉक्टर कुरियन के सफल व्यक्तित्व को ध्यान में रखते हुए उन्हें नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। दुग्ध उत्पादकों के आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान हेतु सतत प्रयासरत डॉक्टर कुरियन की अध्यक्षता में सन 1970 में नेशनल डेहरी डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा विश्व का सबसे विशालतम कार्यक्रम ऑपरेशन फ्लड श्वेत क्रांति की योजना शुरू की गई। जिससे भारत विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बन गया।

 

डॉक्टर कुरियन के सकारात्मक सोच सच्ची लगन एवं कार्य निष्ठा के बदौलत ही भारत में डेयरी उद्योग आत्मनिर्भर उद्योग बन गई। उन्होंने अपने कार्यकाल में लगभग 30 विकास दम संस्थाओं जैसे कि अमूल, जीसीएम, आईएआरएम, एनडीडीबी आदि संस्था की स्थापना की जो किसानों द्वारा प्रतिबद्ध है। डॉक्टर कुरियन ने कहां है कि कोई भी काम मुश्किल नहीं है मुश्किल जब किया इरादा पक्का जैसी कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है कि एक मैकेनिकल इंजीनियरिंग के मजबूत इरादे एवं दृढ़ इच्छाशक्ति से श्वेत क्रांति कल्पना एवं इससे सफलता पूर्वक कार्य आंदोलित कर भारत में दूध की कमी को दूर करने और ग्रामीण लोगों को विशेषकर महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देकर भारतीय आबादी की पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु डेयरी विकास को गति देते हुए मार्गदर्शन किया। जिससे ना केवल ग्रामीणों के आर्थिक एवं सामाजिक विकास हेतु बल्कि आज शहरों की उपयोगिता को भी आसानी से दूध की उपलब्धता के साथ-साथ विश्व के मानचित्र में भारत अग्नि दूध उत्पादक देशों में दिखता है। उनके उत्कृष्ट कार्यो के लिए उन्हें कृषि रत्न पद्म श्री पद्म विभूषण आदि से सम्मानित किया गया है।

 

कैसे हुई अमूल की शुरुआत : 

वर्गीज कुरियन ने ही अमूल की स्थापना की थी. उनका सपना था – देश को दूध उत्पादन में आत्मनिर्भर करने के साथ ही किसानों की दशा सुधारना. उनका पेशेवर जीवन सहकारिता के माध्यम से भारतीय किसानों को सशक्त बनाने पर समर्पित था. उन्होंने 1949 में कैरा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड (KDCMPUL) के अध्यक्ष त्रिभुवन दास पटेल के अनुरोध पर डेयरी का काम संभाला. सरदार वल्लभभाई पटेल की पहल पर इस डेयरी की स्थापना की गई थी.

 

वर्गीज कुरियन के नेतृत्व में को-ऑपरेटिव की दिन दूना, रात चौगुनी प्रगति होने लगी. गांव-गांव में KDCMPUL की को-ऑपरेटिव सोसाइटियां बनने लगीं. इतना दूध इकट्ठा होने लगा कि उनकी आपूर्ति मुश्किल होने लगी. इस समस्या को हल करने के लिए मिल्क प्रॉसेसिंग प्लांट लगाने का फैसला हुआ ताकि दूध को संरक्षित किया जा सके. देखते-देखते आणंद के पड़ोसी जिलों में भी को-ऑपरेटिव का प्रसार होने लगा.

 

 

ऐसे मिला अमूल नाम : 

डॉक्टर कुरियन KDCMPUL को कोई सरल और आसान उच्चारण वाला नाम देना चाहते थे. कर्मचारियों ने अमूल्य नाम सुझाया, जिसका मतलब अनमोल होता है. बाद में अमूल नाम चुना गया.

 

 

भैंस के दूध से पहली बार बनाया पाउडर : 

 

भैंस के दूध से पाउडर का निर्माण करने वाले कुरियन दुनिया के पहले व्यक्ति थे. इससे पहले गाय के दूध से पाउडर का निर्माण किया जाता था. उस वक्त भैंस के दूध का पाउडर बनाने की तकनीक नहीं थी. इस दिशा में काम होने लगा. 1955 में दुनिया में पहली बार भैंस के दूध का पाउडर बनाने की तकनीक विकसित हुई. कैरा डेयरी में अक्टूबर 1955 में यह प्लांट लगाया गया. यह अमूल की बहुत बड़ी सफलता थी.

 

 

कब शुरु हुआ ऑपरेशन फ्लड : 

ऑपरेशन फ्लड कार्यक्रम 1970 में शुरू हुआ था. ऑपरेशन फ्लड ने डेयरी उद्योग से जुड़े किसानों को उनके विकास को स्वयं दिशा देने में सहायता दी, उनके संसाधनों का कंट्रोल उनके हाथों में दिया. राष्ट्रीय दुग्ध ग्रिड देश के दूध उत्पादकों को 700 से अधिक शहरों और नगरों के उपभोक्ताओं से जोड़ता है.

 

अमूल की सफलता से अभिभूत होकर तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने अमूल मॉडल को अन्य स्थानों पर फैलाने के लिए राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड (एनडीडीबी) का गठन किया और डॉक्टर कुरियन को बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया. एनडीडीबी के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने भारत को दुनिया में सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बनाने के लिए ‘ऑपरेशन फ्लड’ की अगुवाई की और अमूल को घर-घर में लोकप्रिय बनाया. वे 1973 से 2006 तक गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड के प्रमुख और 1979 से 2006 तक इंस्टीट्‍यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट के अध्यक्ष रहे.