बिहार ने देश को मुद्दों पर चुनाव लड़ना सिखाया, बंगाल और अन्य राज्यों के लिए उदाहरण: दीपांकर

 

 

बिहार चुनाव में जनता का जो एजेंडा सामने आया, वह बंगाल और अन्य चुनावों के लिए भी उदाहरण बनेगा। बिहार ने देश को मुद्दों पर चुनाव लड़ना सिखाया है। अब यहां उठे सवाल दूसरे राज्यों के चुनाव का एजेंडा बनेंगे। यह बात माले महासचिव दीपांकर भट्टाचार्या ने पटना में संवाददाता सम्मेलन में कही।

माले महासचिव ने कहा कि परिणाम से साफ है कि बदलाव का जबरदस्त संकल्प था। विपक्षमुक्त लोकतंत्र बनाने की भाजपा की साजिश को भी लोगों ने नकार दिया। कोरोना, लॉकडाउन और विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए जनता ने इस चुनाव को एक जनांदोलन में बदल दिया। भाजपा के लोग अब यह प्रचारित करने की कोशिश कर रहे हैं कि आक्रोश केवल नीतीश जी के खिलाफ था। लेकिन यह तथ्यात्मक रूप से गलत है।

विगत 15 साल की सरकार में भाजपा बराबर की साझीदार है। केंद्र में उन्हीं की सरकार है। लॉकडाउन जैसे प्रोजेक्ट भी केंद्र सरकार के ही हैं। सुरक्षित रोजगार का सवाल था तो रेलवे का निजीकरण भी उतना ही बड़ा मुद्दा था। इस चुनाव ने नीतीश सरकार के साथ-साथ केंद्र की भाजपा सरकार को भी कटघरे में खड़ा किया है।

महागठबंधन के खिलाफ एनडीए के लोगों का अनाप-शनाप हमला सबने देखा। सबसे ज्यादा हमला माले पर केंद्रित था। लेकिन हमने अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। जो एजेंडे तय हुए हैं, उस पर विधानसभा के अंदर से लेकर बाहर तक अब जबरदस्त लड़ाई छिड़ेगी। 26 नवंबर को देश के तमाम ट्रेड यूनियन की साझी हड़ताल है। श्रम कानूनों को बदल देने और उन्हें गुलाम बना देने के खिलाफ यह हड़ताल है। इसमें हम मजबूती से उतरेंगे और आंदोलनों को तेज करने की दिशा में बढ़ेंगे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य सचिव कुणाल और कविता कृष्णन भी थीं।

माले पोलित ब्यूरो की बैठक आज
माले के राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि ने कहा कि पार्टी का विधायक दल जन अपेक्षाओं पर खरा उतरेगा। विधानसभा के अंदर और बाहर हम आंदोलनों को तेज करेंगे। यह भी कहा कि 16 नवंबर को पोलित ब्यूरो और 17 नवंबर को राज्य कमेटी की बैठक पटना राज्य कार्यालय में होगी। बैठक में विधायक दल का गठन व आगे की कार्ययोजनाओं पर चर्चा होगी।